Saturday, July 13, 2013

By नौशाद (Noushaad)

 जुल्फें बिखरी है रूखे रौशन पर 
या घटा छा गई है गुलशन पर 

दिल की तारीख लिख रहा हु मैं 
आसुओं के सहारे दामन पर 

लुट गए गीत उजड़ गए झूले 
ऑस पड़ जाए ऐसे सावन पर 

दोस्तों ने किये है ऐसे करम 
प्यार आने लगा है दुश्मन पर 

तीर मेरे जिगर को तक्ता है 
मेरी नज़र है तीर अफगन पर 


नौशाद 

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