वो एक शख्स जो दिल को भला भला सा लगे
उसी से मेरा मुकद्दर खफा खफा सा लगे
यह आँधियों की नवाज़िश यह ज़ुल्मतो का करम
कि हर चिराग-ए-तमन्ना बुझा बुझा सा लगे
तुम्हारे ख़त में हर एक बात साफ़ लिखी है
बस एक लफ्जे मोहब्बत मिटा मिटा सा लगे
न अजनबी की तरह और न आशना की तरह
यह कौन है की जो सब से जुदा जुदा सा लगे
तेरे लबो पर तबस्सुम तो है मगर 'बानो'
है क्या सबब की तेरा दिल दुखा दुखा सा लगे
शकीला 'बानो' भोपाली
